वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः
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राष्ट्रीय श्रोत्रीय ब्राह्मण संघ Rashtriya Shrotriya Brahman Sangh

वेदों में निहित. मगध में आधारित. राष्ट्र की सेवा में समर्पित.

वह राष्ट्रीय मंच जो श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज को एक सूत्र में जोड़ता है — अपनी धरोहर की रक्षा हेतु, अपने परिवारों के उत्थान हेतु, अपनी युवा पीढ़ी की शिक्षा हेतु, और एक सशक्त व न्यायपूर्ण भारत के निर्माण हेतु.

राष्ट्रीय श्रोत्रीय ब्राह्मण संघ का आधिकारिक प्रतीक चिह्न — यज्ञ करते हुए ऋषि, ऊपर ग्रंथ, धनुष एवं बाण, तथा ध्येय वाक्य वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः

नवीनतम: राष्ट्रीय अधिवेशन [वर्ष] हेतु पंजीकरण प्रारंभ हो चुका है. सभी राज्यों के सदस्य सादर आमंत्रित हैं. कार्यक्रम सूची देखें →

हमारा परिचय

पीढ़ियों से निभाया गया एक अखंड दायित्व

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पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज ने एक ही अखंड दायित्व निभाया है — श्रुति अर्थात् वेदों के सुने हुए शब्द का संरक्षण, और विद्या को समाज की सेवा में समर्पित करना.

श्रोत्रीय शब्द का अर्थ ही है — वह जिसने वेदों में प्रवीणता प्राप्त की हो और उन्हीं के अनुसार जीवन जिया हो. यह केवल हमारा नाम नहीं, हमारा कर्तव्य है.

हम अपनी सांस्कृतिक भूमि मगध को मानते हैं — वर्तमान बिहार में स्थित वह प्राचीन विद्या एवं राजनीति का केंद्र, जिसे संसार आचार्य चाणक्य की कर्मभूमि तथा भारत के महानतम ऋषियों और विद्वानों की जन्मस्थली के रूप में स्मरण करता है.

हमारा इतिहास पढ़ें

मगध — हमारी सांस्कृतिक भूमि

प्राचीन विश्व में विद्या, शासन और धर्म का महान केंद्र; वह भूमि जो आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) से जुड़ी है — आचार्य, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्र के रचयिता.

उतार-चढ़ाव भरा इतिहास

आक्रमणों, पारंपरिक संरक्षण के ह्रास और स्वतंत्र भारत के व्यापक सामाजिक परिवर्तनों के बीच हमारा भाग्य चढ़ा भी और उतरा भी. जो कभी नहीं टूटा, वह था गुरु से शिष्य तक पहुँचती विद्या की अटूट परंपरा.

हमारे चार स्तंभ

हमारे मूल सिद्धांत

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चार संकल्प संगठन के हर कार्यक्रम को दिशा देते हैं — सबसे छोटी ज़िला बैठक से लेकर राष्ट्रीय अधिवेशन तक.

विद्या

नई शताब्दी में संस्कृत एवं वैदिक विद्या को जीवंत बनाए रखना.

सेवा

बिना किसी भेदभाव के, जिन्हें सबसे अधिक आवश्यकता है उनके लिए शिक्षा, कल्याण और राहत.

संगठन

एक परिवार — राज्यों, ज़िलों और पीढ़ियों से जुड़ा हुआ.

संस्कृति

मंदिरों, परंपराओं और उन मूल्यों की रक्षा जो समाज को जोड़े रखते हैं.

एक दृष्टि में संगठन

नीचे दिए आँकड़े उदाहरण मात्र हैं — प्रकाशन से पूर्व इन्हें अपनी सत्यापित सदस्यता एवं कार्यक्रम संख्या से बदलें.

0राज्य इकाइयाँ
0ज़िला इकाइयाँ
0सदस्य
0लाभान्वित विद्यार्थी
गतिविधियाँ

धरोहर से कर्म तक

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कक्षाओं से राहत शिविरों तक, संस्कृत कार्यशालाओं से सांस्कृतिक उत्सवों तक — संगठन वर्ष भर सक्रिय रहता है, समाज के लिए भी और राष्ट्र के लिए भी.

शिक्षा

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, व्यावसायिक मार्गदर्शन, डिजिटल साक्षरता एवं प्रवेश सहायता.

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छात्रवृत्ति

प्रतिभा-सह-आवश्यकता आधारित शुल्क सहायता, छात्राओं हेतु विशेष सहयोग एवं एकमुश्त अनुदान.

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संस्कृत प्रचार

शिविर एवं साप्ताहिक कक्षाएँ, पाठशालाओं को सहयोग, श्लोक प्रतियोगिताएँ एवं विद्वत् सम्मान.

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समाज सेवा

स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर, आपदा राहत, वितरण अभियान तथा वृद्धजन सहायता.

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सांस्कृतिक कार्यक्रम

वार्षिक महोत्सव, विद्वानों की जयंतियाँ, कवि सम्मेलन, प्रवचन एवं धरोहर यात्राएँ.

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धरोहर एवं मंदिर

गोत्रों एवं मौखिक इतिहास का प्रलेखन, मंदिर जीर्णोद्धार, रख-रखाव एवं तीर्थ जानकारी.

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सङ्घे शक्तिः कलौ युगे

संगठन में ही शक्ति है

सदस्यता संगठन की नींव है. प्रत्येक सदस्य समाज की आवाज़ को सशक्त करता है, उसकी सेवा का विस्तार करता है, और उसके लाभों में सहभागी बनता है.